श्री श्याम मंदिर जैतपुर धाम जिला अलवर राजस्थान
ॐ श्री श्याम देवाय नमः
श्री श्याम मंदिर जैतपुर धाम जिला अलवर राजस्थान
पूर्वजो के कथानुसार ज्ञात श्री रतनलाल जी ग्राम मूसलोता (निकट नांगल चौधरी हरियाणा) से आकर विक्रमी संवत 1800 से लगभग ग्राम जैतपुर ( तत्कालीन जैताक्षनगर ) में सहपरिवर रहने लगा । रतनलाल श्री दुर्गा मैया जी का अनन्य उपासक था अतः जब माँ दुर्गा मैया जी का भंडारा समय ज्योति प्रजवलित की गई तब मातेश्वरी दुर्गा मैया जी ने प्रश्न होकर आदेश दिया की हे भगत यहाँ मेरे अनन्य भगत श्री श्याम जी (महाभारत कालीन बर्बरीक ) का धाम हैं अतः आज के पश्चात उसकी उपासना शुरू कर दो।
शुरुआत में जैतपुर पुजारी परिवार खाटुधाम श्यामबाबा के दर्शन करने जाता था। लेकिन एक बार रतनलाल जी खाटूधाम से श्यामबाबा के दर्शन करके वापस आ रहे थे तो रास्ते में चोरों ने ने हमला कर दिया, फिर बाबा ने रतनलाल जी की चोरों से रक्षा की ओर, जैतपुर में ही, श्यामबाबा का मन्दिर बनाकर पूजा अर्चना करने का आदेश दिया
श्री श्याम प्रभु उपासना शुरू करने के पश्चात श्री श्याम प्रभु जी ने द्रष्टान्त देकर भगत रतनलाल जी से कहा कि यहां मेरा निवास हैं अतः स्थापना कर उपासना शुरू कर दो । भगत रतनलाल जी ने झोपड़ी पट्टी बनाकर कच्चे चौके पर ही बाबा की प्रतिष्ठा करवा कर उपासना की । भगत की इच्छानुसार उसके स्वर्गवास होने पर उनके पुत्र धर्मचंद जी ने मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कर दिया, किन्तु उनकी असमय मृत्यु होने से यह भार उनके पुत्र भगत श्री सेढूराम जी के कंधों पर आ गया । कहते हैं कि जब भगत सेढूराम जी मात्र 15 वर्ष के थे तभी उनकी भक्ति के चमत्कार प्रारंभ हो गए थे। भगत सेढूराम जी के कार्यकाल में ही स्वतः 1830 में मंदिर का निर्माण कार्य पूरा हुआ तथा उनके समय में अनेकों भगत दूर-दूर से आकर बाबा की पूजा उपासना करने लगे श्री सेढूराम भगत जी के कार्यकाल में ही नीमराणा रियासत के तत्कालीन राजा महाराज पृथ्वी सिंह ने 12 बीघा जमीन (कच्ची) मंदिर के भोग खर्च हेतु सम्वत 1885 में दान स्वरूप प्रदान की । श्री सेढूराम भगत जी ने लगभग 70-75 वर्षों तक मंदिर के सेवा पूजा करने के बाद श्यामलीन हो गए। श्री सेढूराम भगत जी के श्यामलीन होने के बाद उनके पुत्र श्री निहालचन्द भगत जी ने अपना सम्पूर्ण जीवन श्याम बाबा के श्री चरणों मे समर्पित किया तथा अन्त में बाबा श्याम के ध्यान में लीन रह कर अपना शरीर छोड़ा। भगत श्री निहालचन्द जी के सुपुत्र एवं परम् वीतरागी भगत श्री धनीराम जी ने मंदिर का कार्यभार संभाला । भगत श्री धनीराम जी आत्मज्ञानी पुरूष थे । जिनकी प्रसिद्धि जैतपुरधाम के अतिरिक्त राजस्थान प्रान्त के बीकानेर क्षेत्र तक थी तथा अनेको क्षेत्रो के भगत उनके श्रद्धालु रहे भगत श्री धनीराम के पश्चात मंदिर का भार श्री नेतराम भगत जी ने सवतः 1987 में संभाला ओर लगभग 50 वर्षों तक उन्होंने बाबा की सेवा पूजा की श्री नेतराम भगत जी का ज्योतिष शास्त्र में भी महान विद्वानों की श्रेणी में उनका आज भी नाम लिया जाता हैं। भगत श्री नेतराम जी के श्यामलीन होने के पश्चात उनके पुत्र श्री साँवल राम भगत जी ने मंदिर का चहुँमुखी विकास कराया। उन्ही के कार्यकाल में शुक्लपक्ष एकादशी को जागरण प्रारंभ हुआ तथा मंदिर जीणोद्धार हुआ।
उन दिनों तक जैतपुर श्याम मंदिर का इतना प्रचार नही था । केवल वही यात्री धोक लगाने आते थे जिनकी मानता थी । आसपास के गाँव से गाँव झांसवा जिला झज्जर से श्यामलीन श्री उदमीराम शर्मा के पुर्वज भी जैतपुर मंदिर में धोक देने आते थे । परंतु गठजोड़ा व जात जड़ूला खाटु धाम में ही देते थे । श्यामलीन उदमी राम शर्मा जी झाँसवा वाले निज मंदिर जैतपुर धाम के पुजारी भगत नेतराम जी के बहुत निकट प्रेमी थे और एक दूसरे का घर के कार्यक्रम में आना जाना था जो कि भगत नेतराम जी केवल श्यामलीन श्री उदमीराम शर्मा जी के पास ही ठहरते थे । उसी दौरान श्यामलीन श्री उदमीराम शर्मा जी को बाबा श्याम का आदेश हुआ कि आपके परिवार के नवपुत्रवधू का गठजोड़ा व नवशिशु पुत्र का जड़ूला जैतपुर धाम में होगा इसके उपरांत सन 1985 में भगत उदमीराम जिनके घर पर पौत्र ने जन्म लिया जिसका मुंडन जैतपुर धाम में करवाया और गठजोड़ा कि जात दिलवाई उसकर बाद से यह परंपरा झाँसवा गाँव से उदमीराम शर्मा वत्स परिवार से हर साल फाल्गुन सुदी दसमी को मंदिर प्रांगण में कीर्तन का आयोजन उदमीराम जी व जिनके सुपुत्र वेद प्रकाश शर्मा व सभी भाइयों के द्वारा किया जाता है, जो परम्परा इससे पहले कीर्तन करने की मंदिर में नही थी । फाल्गुन सुदी एकादशी को श्याम बाबा की सवामणी का भंडारा किया जाता है और एकादशी के दिन बाबाश्याम की शोभा यात्रा, बैंड, DJ, ढोल ,निशान, गुलाल के साथ, बाबा की झांकी निकाली जाती हैं ,जिसमें भक्तों की भीड़ बाबा के दर्शन कर श्यामबाबा की कृपा पाती है ।
श्यामबाबा की इस शोभायात्रा में मंदिर कमेटी व ग्राम पंचायत जैतपुर से भरपूर सहयोग मिलता हैं ।
श्री श्याम मंदिर जैतपुर धाम के प्रचार के लिए श्री वेद प्रकाश शर्मा सुपुत्र श्री श्यामलीन श्री उदमीराम शर्मा जी ने श्यामलीन श्री श्याम सुंदर शर्मा पालम वाले महामंत्र रचयिता ॐ श्री श्याम देवाय नमः जो कि अपने जमाने के विख्यात भजन लेखक व गायक थे मंदिर का प्रचार देश विदेश में जाकर हर कीर्तन में जाकर जैतपुर मंदिर की महिमा का वर्णन किया और वेद प्रकाश शर्मा जी के आग्रह पर श्यामलीन श्री श्याम सुंदर शर्मा जी को फाल्गुन मेले में कीर्तन करवाने के लिए आमंत्रित किया और उन्होंने स्वीकार करके जी भर के बाबा का गुणगान जैतपुर धाम प्रांगण में किया। भगत उदमीराम शर्मा जी के परिवार द्वारा फाल्गुन मेले पे श्याम बाबा के मंदिर की सजावज बाबा का श्रृंगार वत्स परिवार द्वारा हर वर्ष किया जाता है ओर सन 2000 से दशहरे के अवसर पर गाँव झाँसवा से पूरा वत्स परिवार निशान लेकर बाबा श्याम को पदयात्रा करता हैं। श्री श्याम बाबा के आशीर्वाद से आज जैतपुर धाम में भारी भीड़ ओर चहल पहल रहती है
साँवल राम भगत जी ने 23 -24 वर्षों तक बाबा श्याम जी सेवा पूजा की तथा हर माह भगतो के लिए भंडारे की व्यवस्था की जो आज भी जारी है
"श्री साँवल राम" भगत जी 27 मार्च 2002 फाल्गुन शुक्ला द्वादशी को श्यामलीन हो गए थे संयोग से भगत साँवल राम जी का जन्म फाल्गुन शुक्लपक्ष एकादशी हैं अतः उनका नाम "साँवल राम" रखा गया
वर्तमान में साँवल राम जी के पाँच पुत्रों (श्री रतिराम जी, श्री रामअवतार, श्री देशराज, श्री ओम प्रकाश व श्री विरेंदर) द्वारा मंदिर के प्रन्यास के रूप में सेवा पूजा की जा रही है
प्रन्यास का नाम :- श्री श्याम मंदिर जैतपुर धाम
प्रन्यास का कार्यलय :- श्री श्याम मंदिर जैतपुर धाम, पो परतापुर, तह. बहरोड़ जिला अलवर राजस्थान 301704
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🖋️🖋️🖋️🖋️राधेश्याम वत्स✒️✒️✒️✒️