सेवा म थारी बाबा मन्नै एक निशान चढाणा सै ।।

तर्ज :-मैं के बोलू श्याम धणी तन्ने सब बाता का बेरा सै

                       भजन

खाटू के श्री श्याम धणी, मन्नै तुमको रिझाणा सै ।।
सेवा म थारी बाबा मन्नै एक निशान चढाणा सै ।।

मैं बचपन से तेरे आ रह्या, ना बोल्या कचुला निशान मेरा
तेरे खूब नजारे देखे, मैं मानूगा अहसान तेरा
मैं सौदा करने ना आया-२ मन्नै सिर पै हाथ धराना सै ।।

मेरी पतली हालत बाबा, मैं चांदी नही चढ़ा सकता
विश्वास मेरा पक्का सै, कभी मेरा काम नही रुकता
घर जैसा मेरा नाता सै-२ फिर सोने चाँदी मैं क्यूँ फ़साना सै ।।

एक सुनियारा तै के हो, यो सारा गाम चले संग में
के बालक ओर के बूढ़े , सब दिख रहे तेरे रंग मैं
सारा रस्ते कीर्तन गावां-२तन्नै आज नचाणां सै ।।

"राधेश्याम" तेरा बालक, यो सौदे बाजी नही जाणे
बड़े बूढा न जो बताया, वे ही वसूल यो माने है
केशव श्यामा मेरे दो बालक -२ इनको भी पाठ पढ़ाना सै।।

भजन रचयिता राधेश्याम वत्स

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