मेरे खाटू वाले,मीठे बिन भोग ना लावे
तर्ज:- ज्यूँ ज्यूँ फागण नीड़े आवे याद कसूती आवे
रोज बणे जो घर में म्हारे, उसने क्यूँ ना खावे।।
मेरे खाटू वाले,मीठे बिन भोग ना लावे।।
सेठा न बिगाड़ा बाबा, छप्पन भोग खिला के तू
मोटा रोट क्यूकर खावे,भीतरले में अटके न्यू
सीधा सादा भगत जिमावे, क्यू ना रोटी खावे।।
रईसा आला ठाठ कोन्या,सीधा सादा काम सै
सारे दिन धन्धा करता, मुँह पे तेरा नाम सै
बैठण न नहीं ऊँचा आसण, धरती पे क्यू ना खावे।।
ताजा दूध काढ भैंस का उजली खीर बनाऊँगा
अपने हाथां कूट चूरमा, देशी घी मिलाऊँगा
हरे मूंगा की दाल राधके, कुणबा बैठ जिमावे।।
छकके जीमो खाटूवाला, हाथ से पंखा ढुलाऊंगा
म्हारा अपणा कुछ भी कोन्या, तेरा दिया खिलाऊँगा
हाथ मेरा की सेवा केवल,क्यूं ना लेकर जावे।।
"राधेश्याम" देशी बालक, सीधे साढ़े ठाठ हैं
केशव कन्हैया कब आवोगे, देखे तेरी बाट हैं
म्हारे घर मे जै आज्या तो, पूरी मस्ती छावै।।
भजन रचयिता :- राधेश्याम वत्स
Mob No :- 9968876415