रिमोट मेरे श्याम का खुद ही चलाता हैं

तर्ज :- भभूति मेरे श्याम की कमाल करती हैं

रिमोट मेरे श्याम का खुद ही चलाता हैं।।
किसको क्या देना हैं, उतना दबाता हैं।।

श्याम का रिमोट देखो बड़ा ही निराला-२
जिसको सम्भाले मेरा श्याम खाटू वाला-२
जैसा सवाली आए वैसा ही दब जाता हैं।। रिमोट...

निर्धन जो आए मेरे श्याम के द्वारे-२
उसके तो पल में करदे देखो वारे न्यारे-२
सारी उम्र वो तेरे गीत गाता हैं।। रिमोट...

भावना हो जिसकी जैसी उतना ही पाए-२
मंदिर की पैड़ी चढ़ते ही निर्णय हो जाए-२
ऐसे भगतो से इनका अदभुत नाता हैं।। रिमोट...

"राधेश्याम" को तेरा ही सहारा-२
श्याम तुम देते रहना अपना इसारा
तेरा रिमोट सबका काम बनाता हैं।। रिमोट
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रचयिता :- राधेश्याम वत्स

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