मन्दिरीये के आगे अखाड़ो, फेर लगाओ जी
तर्ज:- थारी मोरछड़ी लहराओ जी
मन्दिरीये के आगे अखाड़ो, फेर लगाओ जी
बेगा आओ जी, श्याम थे बेगा आओ जी।।
ग्यारस की रात न, निज मंदिर के आगे, भजनों का सार हो
गुरु आलू सिंह जैसी,दीवानगी वाला,भगत का साथ हो
इन गरजणिया गावणीया तै, प्रभु गेल छुटाओ जी।।
बेगा आओ जी.....
श्रीश्याम कुण्ड में जा,चरणामृत जल को ले,फ़िर अस्नान करां
बारस कि ज्योत ले, बाबा का ध्यान धर, अरदास करां
मोरछड़ी को झाड़ो ले, किस्मत खुलवाओ जी।।
बेगा आओ जी.....
परिवार न संग ले, श्री श्याम बगीची में, प्रस्थान करो
जहां दाल चूरमा का, प्रसाद खाया था, उस भगत को प्रणाम करो
"राधेश्याम" कह भोग लगाके, भगत जिमाओ जी।।
बेगा आओ जी.....
भजन चयिता:- राधेश्याम वत्स नांगलोई दिल्ली
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