खर्चो तो भेजो बाबा,ल्यावा कोनी उधार।।

तर्ज:- बार बार मैं तुम्हे पुकारु ...

पैदल चल कर आवां बाबा, ले सारा परिवार
खर्चो तो भेजो बाबा,ल्यावा कोनी उधार।।

घर से हम तो चाल पड़े,अब तेरा ही सहारा हैं-२
जहाँ भी ठहरे वो घर,हमको स्वर्ग से भी प्यारा हैं-२
रात वहां पर कीर्तन करके, बोला जय जयकार।।

ऊठ सवेरे हँसते हँसते, श्याम निशान उठावा हो-२
बड़े भाव से थाल सजाकर,थारी आरती गावां हो-२
चलने से पहले थोड़ा सा, ले लेवा फलिहार।।

रींगस से खाटू का रस्ता, लगता बड़ा सुहाना हैं-२
इस रस्ते से हम भगतो का, रिस्ता बड़ा पुराना है-२
भगतो के संग हमने देखे, लाखों चमत्कार।।

मंदिर आगे होली खेला, मन मे चाव बड़ा भारी-२
जीवा इतने दर्शन चाहवा, याहे विनती हैं म्हारी-२
भूल चूक की माफी हमकों, दे दीज्यो सरकार।।

"राधेश्याम" तो विनती करता, आगे मर्जी थारी जी-३
"केशव" बालक पैदल आ लिया, अबके "श्याम" की बारी जी-२
"श्याम मण्डल" पर कृपा रखना, हो लीले असवार।।

भजन रचयिता :- राधेश्याम वत्स नांगलोई दिल्ली

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