सारे मिलकर प्रेम से बोलो, श्याम की जयजयकार ।।

तर्ज :-देता हरदम साँवरे तू हारे का साथ

निशान उठाओ श्याम का चलो श्याम के द्वार ।।
सारे मिलकर प्रेम से बोलो, श्याम की जयजयकार ।।

श्याम का निशान बड़े, दिल से सजाया हैं
हीरे मोती सच्चा घोटा, इसमे लगाया हैं
बाबा की सौगात हैं, करे इसे स्वीकार।।

रुकता नही झुकता नही, निशान निराला हैं
पग पग पर ये साथ चले, बन कर रखवाला हैं
मस्ती माही नाचता, आवे जब फटकार।।

उठते ही पूजा करो, ओर धरो श्याम का ध्यान
शयन आरती भी करो, ओर फिर करो विश्राम
सुपने में आवे साँवरा, भर जाए भंडार।।

चल रहा भगतों का रेला, खाटू धाम की ओर
पूर्व पश्चिम उत्तर दक्षिण, श्याम धणी का शोर
"राधेश्याम"भी देख रहा, खड़ा श्याम के द्वार।।

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