सपने मैं खाटू वालो, श्याम मिल गयो
तर्ज:- छोटो सो वानर हद कर गयो
सपने मैं खाटू वालो, श्याम मिल गयो ।।
घणे दीना सै बिगड़ा, सारा काम कर गयो ।।
ठाठ बाट से सो रहा था मैं, घर के अंदर खाट पे
लीले वाला हँसता दिखा,अपना घोड़ा डाट के
माथे पे जादू आलो, हाथ धर गयो।।
गद गद काया मेरी होगी, मूरत देखी श्याम की
ऐसी मस्ती मन मे छागी, रटना लागी नाम की
पल्ला बिछाया मेरी, झोली भर गयो।।
हाथ फेर के चालण लाग्या, भगता का वो रखवाला
खाटू जावण का न्योता देगा, करग्या मुझको मतवाला
मोरछड़ी का झाड़ा देके, लीले चढ़ गयो।।
"राधेश्याम" क चढ़ी खुमारी, खाटू नगरी जाणे की
घणे दिना से मन म आरी, श्याम कुण्ड म न्हाणे की
मंदरीया की पैड़ी ऊपर, बाबो मिल गयो।।
भजन रचयिता:- राधेश्याम वत्स दिल्ली