सेवा में थारी बाबा मन्नै,एक निशान चढाणा सै ।।

खाटू के श्री श्याम धणी, मन्नै तुमको आज पटाणां सै ।।
सेवा में थारी बाबा मन्नै,एक  निशान चढाणा सै ।।

बचपन से मैं आ रहा, ना बोल्या कबूला निशान मेरा
तेरे खूब नजारे देखे, मैं मांनूगा एहसान तेरा
मैं सौदा करने नही आया, मन्नै सिर पै हाथ धराणा सै।। 
सेवा में थारी बाबा मन्नै....

मेरी पतली हालत बाबा, मैं चाँदी नही चढ़ा सकता
विश्वास मेरा पक्का सै, कभी मेरा काम नही रुकता
घर जैसा मेरा नाता तुमसे, फिर सोने चांदी में क्यूं फ़साना सै।।
सेवा में थारी बाबा मन्नै...

एक सुनियारा तै के हो, यो सारा गाम चले संग में
के बालक और के बूढ़े, सब दिख रहे तेरे रंग में
सारा रस्ता कीर्तन गावां, तन्नै आज नचाणां सै।।
सेवा में थारी बाबा मन्नै...

"राधेश्याम" तेरा बालक, यो सोदे बाजी नही जाणे है
बड़े बुढो ने जो बताया , यो वो ही वसूल सब माने है
केशव - श्यामा मेरे दो बालक, इनको भी पाठ पढ़ाणां सै
सेवा में थारी बाबा मन्नै....

भजन रचयिता :- राधेश्याम वत्स दिल्ली


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